"क्या बात है वसु ,,,,,, बड़ी उदास लग रही हो ,,,,, समथिंग रोंग विद यू ? मैं कई दिनों से "क्या बात है वसु ,,,,,, बड़ी उदास लग रही हो ,,,,, समथिंग रोंग विद यू ? मैं कई दि...
ग़ज़ल ग़ज़ल
कई बार हमारी कोई स्मृति हमें असमंजस में ला छोड़ती है कई बार हमारी कोई स्मृति हमें असमंजस में ला छोड़ती है
खुद को झांक जरा अंदर आग काफी है जिंदगी में बस अब एक उड़ान बाकी है। खुद को झांक जरा अंदर आग काफी है जिंदगी में बस अब एक उड़ान बाकी है।
मुकेश बिस्सा श्री कन्हैया कुंज,4 नवखुनिया, गांधी कॉलोनी,जैसलमेर मुकेश बिस्सा श्री कन्हैया कुंज,4 नवखुनिया, गांधी कॉलोनी,जैसलमेर
पत्थर की इस दुनिया में, पत्थर की इस दुनिया में,